8 मार्च 2020 - 16:55
सीएए संबंधित जानकारियों को सार्वजनिक करने से भारतीय गृह मंत्रालय का इंकार, मोदी सरकार आख़िर सीएए के संबंध में क्या छिपा रही है?

अमित शाह की अगुवाई वाला भारत का केंद्रीय गृह मंत्रालय विवादित नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करने और इस क़ानून पर उठ रहे सवालों का जवाब देने से लगातार इनकार कर रहा है।

प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत के प्रसिद्ध न्यूज़ पोर्टल साइट द वायर द्वारा सीएए को लेकर दायर किए गए कई सूचना का अधिकार (आरटीआई) आवेदनों पर भारतीय गृह मंत्रालय ने बोगस आधार पर जवाब देने से मना कर दिया और कुछ मामलों में सूचना देने के लिए आरटीआई एक्ट, 2005 में तय की गई समयसीमा का भी उल्लंघन किया है। हालांकि भारतीय गृह मंत्रालय के केंद्रीय जन सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) ने 29 फ़रवरी को भेजे अपने जवाब में जानकारी देने से साफ़ इंकार कर दिया है। जोशी ने दलील दी कि अगर यह जानकारी सार्वजनिक की जाती है तो इससे विदेशी राज्यों के साथ भारत के संबंध ख़राब हो सकते हैं। भारत के गृह मंत्रालय ने अपने जवाब में लिखा, ‘यह फाइलें विदेशी नागरिकों को नागरिकता देने की नीतियों से जुड़ी हुई हैं, ऐसी जानकारी का ख़ुलासा करने से विदेशी राज्यों के साथ संबंध ख़राब हो सकते हैं, इसलिए आरटीआई एक्ट, 2005 की धारा 8(1)(अ) के तहत इस जानकारी का ख़ुलासा करने से छूट प्राप्त है।’

इस बीच भारतीय गृह मंत्रालय के इस जवाब के बाद सीएए को लेकर विवाद और बहस छिड़ गई है। जानकारों का मानना है कि पहले जिस तरह भारत सरकार इस विषय को हर सार्वजनिक रैलियों और बैठकों में कह रही थी उससे तो यह नहीं लगता था कि इसमें कोई ऐसी बात है जो छिपाई जाने वाली है लेकिन जब आरटीआई द्वारा इस संबंध में जानकारी मांगी गई तो गृह मंत्रालय तरह-तरह के बहाने बना रहा है। इस बीच हाल ही में भारत सरकार ने यह भी कहा कि सीएए एक ‘भारत का आंतरिक मामला’ है और ‘किसी भी विदेशी पार्टी के पास भारत की संप्रभुता से संबंधित मुद्दों पर कोई नियंत्रण नहीं है।’ संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख द्वारा नागरिकता संशोधन क़ानून पर सुप्रीम कोर्ट में दायर किए गए आवेदन पर भारत के विदेश मंत्रालय ने यह जवाब दिया था।